Advisory for Yellow Rust of Wheat

गेहूं के पीले रतुआ के लिए सलाह

पंजाब, जम्मू, उत्तराखंड के तरiई, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से 2 जनवरी 2018 तक गेहूं में पीले रतुए की सूचना नहीं है, हालांकि उत्तर भारत में मौसम पीले रतुए के संक्रमण के लिए काफी अनुकूल है। इसलिए. किसानों, विस्तार एजेंसियों, अधिकारियों और राज्य कृषि विभागों के स्टाफ, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से खेतों में जाकर गेहूं में पीले रतुए की जाँच करें तथा इसके बारे में सतर्क रहें। प्रारंभिक संक्रमण फोसाई के रूप में 10-15 पौधों पर एक गोल दायरे में होता है और यह खेत  में आगे फैलता है। पीबीडब्लू 343, पीबीडब्ल्यू 373, डब्ल्यूएच 147, पीबीडब्लू 550, एचडी 2967, डीबीडब्ल्यू 88, एचडी 3059, डब्लूएच 1021 और सी 306 जैसी किस्मों में  पीले रतुए का प्रकोप होने की संभावना है क्योंकि ये किस्में के पीले रतुए के नए रोगप्रकारों के लिए  अतिसंवेदनशील हैं और इनपर खेत में ठीक से नजर रखी जानी चाहिए। संक्रमण के मामले में, रोगी पत्ती पर पीले पाउडर के साथ, पीली पट्टियों का विकास होता है। जब आप दो उंगलियों के साथ संक्रमित पत्ती रगड़ते हैं, तो पीले रंग का पाउडर उंगलियों के टिप्स पर आता है। अगर पीले रंग का पाउडर अनुपस्थित है और 2-3 दिनों के भीतर पूरे खेत  में पत्ते पीले होते हैं, तो ठंड के मौसम के प्रभाव के कारण हो सकता है और आपको फफूदींनाशक  का फसल पर स्प्रे करने की आवश्यकता नहीं है। रतुए आने पर, प्रोक्रोनैजोल @ 0.1% का घोल प्रभावित फसल और आसपास के खेतों को स्प्रे करने की सिफारिश की जाती है।

 

 

Advisory for yellow rust of wheat

Yellow rust of wheat is not reported from Punjab, Jammu, Tarai of Uttarakhand, West UP, Haryana and Rajasthan till 2nd January 2018. However weather in north India is quite favourable for yellow rust infection. It is therefore advised to farmers, extension agencies, officers and staff of state agriculture departments, State agriculture universities and Krishi Vigyan Kendra to keep vigil on occurrence of yellow rust in wheat by visiting the fields regularly. Initial infection takes place in the form of foci on 10-15 plants in a round fashion and it spread further in field. The varieties like PBW 343, PBW 373, WH 147,  PBW 550, HD 2967, DBW 88, HD 3059, WH 1021 and C306  are now become susceptible to new pathotypes of yellow rust and these must be monitored in field properly. In case of infection, the leaf will develop yellow stripes of rust with yellow powder of spores. When you rub infected leaf with two fingers, the yellow powder comes on finger tips. In case the yellow powder is absent then yellowing of leaves on whole field within 2-3 days may be due to the effect of cold weather and you need not to spray the crop with fungicides. In presence of rust infection, it is recommended to spray the affected crop and adjoining fields with propiconazole @0.1%.

 

Crop Protection Programme, ICAR-IIWBR Karnal

 

 

 

 

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