Advisory on Wheat Blast

गेहूँ में ब्लास्ट महाव्याधि के बारे में सलाह

गेहूँ मे ब्लास्ट व्याधि एक कवक,  मेग्नापोर्थे ओरायेज़ी पैथोटाइप ट्रटीकम से पैदा होती हैIयह व्याधि सर्वप्रथम १९८५ में ब्राजील में पायी गयीI बाद में यह बोलीविया,अर्जेंटीना,पैराग्वे,उरुग्वे तथा यूएसए में मिलीI सन २०१६ में यह हमारे पड़ोसी देश, बांग्लादेश में पायी गयी हैI क्योंकि बंगलादेश की सीमा का ४०९६ किलोमीटर्स  भारत की सीमा से लगता है तथा पश्चिमी बंगाल आदि राज्यों की करीब ११ मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र की जलवायु भी ब्लास्ट के संक्रमण तथा फैलाव के लिए उपयुक्त है इसलिए आशंका जतायी जा रही है कि यह व्याधि भारत के उत्तरपूर्वी मैदानी जलवायू क्षेत्र  मे फैल कर गेहूँ की फसल को हानि पहुँचा सकती हैIदिनांक ५ जनवरी २०१८ तक देश में कहीं से भी गेहूँ में ब्लास्ट व्याधि की रिपोर्ट नहीं आई हैi इस बीमारी से गेहूँ की बालियाँ दाने पड़ने से पहले ही सूख जाती हैं तथा उपज में ४०-१००% तकगिरावट आ  जाती हैI

यह रोग, बीज, अवशेष तथा हवा द्वारा फैलता है लफस इसलिए इसकी रोगथाम के लिए बीज बोने से लेकर फसल में दाने पड़ने तक निगरानी तथा नियंत्रण जरुरी हैi गत दो फसल वर्षों से  ब्लास्ट के लिए सघन निरिक्षण, विशेषज्ञों की टीमों के द्वारा, पश्चिम बंगाल तथा असम किया गया तथा कहीं से भी ब्लास्ट मिलने के संकेत नहीं मिले हैI

गेहूं ब्लास्ट की पहचान: गेहूं ब्लास्ट, दानों, पत्तियों तथा बालियों को संक्रमित करती हैI पत्तियों पर शुरु में पानीदार गहरे हरे रंग के धब्बे बनते हैं जो कि बाद में भूरे रंग के नाव के आकर के हो जाते हैंI संक्रमित पत्तियां जल्दी ही सूख जाती हैंI बालियों पर रोग काफी साफ़ एवं भयंकर रूप मे आता हैI संक्रमित बालियाँ समय से पहले ही सूख जाती हैं तथा इनमें ज्यादातर में दाने नहीं पड़तेI जिनमें दाने पड़ते हैं वह हल्के, बदरंग, तथा पतले हो जाते हैंI 

वर्ष २०१७-१८ के लिए गेहूं ब्लास्ट को रोकने के लिए रणनीतियां:  

१.बांग्लादेश से गेहूं के बीज तथा दानों के आयात पर पूर्ण प्रतिबन्धI

२. बीज का उपचार  कवकनाशियों जैसे थीरम, कार्बोक्सिन, कार्बेन्डाजिम, टेबुकोनाजोल से करेंI

३.प्रतिरोधी किष्मों जैसे एच डी २९६७, एच डी ३१७१, डीबीडब्लू ३९, तथा एच डी २०४३ जोकि बोलीविया तथा यू एस ए में रोगरोधी पायी गयी हैं का चयन करेंI

४.फसल के स्वाथ्य का सघन निरिक्षण तथा ब्लास्ट के लक्ष्ण दिखने पर कवकनाशी (तिरिफ्लोइसत्रोबिन ५०% + टेबुकोनाज़ोल २५% डब्लू जी) @ १२० ग्राम/एकड़ की दर से बाली आने के समय छिड़काव करेंI

५.वर्ष २०१७-१८ में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद एवं नादिया जिलों में गेहूं की बुबाई पर अगले दो साल तक पूर्ण रूप से रोक लगा दी हैI इसी तरह बांग्लादेश बॉर्डर के साथ ५ किलोमीटर दूरी तक पश्चिम बंगाल तथा असम में गेहूं की फसल नहीं लगाई जायेगीI

६.किसानों, सीमा सुरक्षा बल तथा बीज विक्रेताऔं को ब्लास्ट बीमारी के बारे में ज्ञान दिया जा रहा हैI

 

 

फसल सुरक्षा विभाग

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्- भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसन्धान संस्थान, करनाल, हरियाणा १३२००१

 

Advisory for Wheat Blast

Blast outbreak in wheat is caused by a fungus, Magnaporthe oryzae pathotype Triticum. This disease was first found in Brazil in 1985. Later it was found in Bolivia, Argentina, Paraguay, Uruguay and USA. It was found in our neighboring country, Bangladesh in 2016. It is important to India since Bangladesh’s shares 4096 km of border with India and the climate of about 11 million hectares of West Bengal and other states is also suitable for the transmission and spread of the wheat blast disease. It is feared that this disease may enter in India and poses threat to wheat in North –eastern plains zone. So far (till January 5, 2018), there is no report of wheat blast disease from anywhere in the country. The disease is capable of causing yield losses from 40-100%. It spreads through diseased seed, crop residue and air. Therefore, it is necessary to prevent and control the disease from sowing till grain filling stage. In the crop year, 2015-16 and 2016-17, through the teams of experts, survey and surveillances for wheat were conducted along Indo-Bangladesh border in West Bengal and Assam but  could not get any sign of wheat blast anywhere.

Identification of wheat blast: It infects the leaves, spikes and grains. On the leaves, the early symptoms appear as water soaked spots with deep green colour which later turns in to brown boat shaped necrotic spots. The infected leaves dry early. Disease symptoms on spikes are quite clear and terrible. The infected rachis portion of spike develops dark brown coloured necrotic spots with or without brown coloured mycelial growth. The infected spikes dry before grain setting. The grains if formed are light, discolored and  shriveled.

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