Weather Based Agro-Advisory for the first fortnight of February, 2018

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
भा.कृ.अनु..भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल– 132 001
(करनाल और इसके आस-पास के गाँवों के लिए)
वेबसाइट: iiwbr.icar.gov.in
साल2, क्रमांक5/201718/बुधवार, समय: अपराह्न (2:30 बजे), दिनांक 3112018

बीते पखवाड़े का मौसम (16-30 जनवरी, 18)
बीते पखवाड़े के दौरान दिन का अधिकतम तापमान 14.5 से 23 डिग्री सेल्सियस(पखवाड़ा सामान्य 19.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 3.0 से 9.0 डिग्री सेल्सियस (पखवाड़ा सामान्य 6.3 डिग्री सेल्सियस)रहा । इस दौरान पूर्वाहन को सापेक्षिक आर्द्रता 70 से 100 तथा दोपहर बाद 43 से 100 प्रतिशत दर्ज की गई । पखवाड़े के दौरान वायु की औसत गति 0.6 से 5.4 कि.मी. प्रति घंटा (पखवाड़ा सामान्य 3.3 कि.मी.प्रतिघंटा) रही । बीते पखवाड़े के दौरान 34.2 मि. मी. वर्षा प्राप्त हुई ।
भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

01-02-18

02-02-18

03-02-18

04-02-18

वर्षा (मि.मी.)

0

0

0

0

अधिकतम तापमान (ᵒC)

23.4

24.2

23.4

22.3

न्यूनतम तापमान (ᵒC)

12.1

11.2

8.9

9.4

बादल आच्छादन (ओक्टा)

0

0

1

0

अधिकतम सापेक्षिक आर्द्रता (प्रतिशत)

34

35

37

37

न्यूनतम सापेक्षिक आर्द्रता (प्रतिशत)

20

20

17

17

वायु की औसत गति  (कि.मी./घंटा)

19.0

15.0

11.0

8.0

वायु की दिशा

पश्चिम – उत्तर- पश्चिम

उत्तर- पश्चिम

 उत्तर – उत्तर- पश्चिम

उत्तर – उत्तर- पूर्व

कृषि परामर्श सेवा के अंतर्गत किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है

  • किसान भाइयों से अनुरोध है कि गेहूँ में आवश्यकता अनुसार सिंचाई करें । बुवाई उपरांत दी जाने वाली नाइट्रोजन को बुवाई के लगभग 40-45 दिन तक फसल में आपूर्ति कर दें । फसल नाइट्रोजन का अधिकाधिक उपयोग कर सके इसके लिए यूरिया को सिंचाई के तुरंत पहले छिड़क कर डालें । कम अवधि वाली गेहूँ की किस्मों में नाइट्रोजन की मात्रा 25 प्रतिशत कम डालें ।
  • देर से बोए गए गेहूँ में संकरी पत्ती खरपतवार के नियंत्रण के लिए क्लोडिनाफोप 15 डब्ल्यू.पी. 160 ग्राम प्रति एकड़ या पिनोक्साडेन 5 ई.सी. 400 मि.ली. प्रति एकड़ का प्रयोग करें । चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के नियंत्रण हेतु 2,4-डी या मेटसल्फूरान 20 डब्ल्यू.पी. 8 ग्राम प्रति एकड़ या कारफेन्ट्राजोन 40 डी. एफ. 20 ग्राम/ एकड़ की दर से छिड़काव करें ।
  • यदि आपके गेहूँ के खेत में संकरी व चौड़ी पत्ती वाले दोनों खरपतवार हो तो आप सल्फोसल्फूरान 75 डब्ल्यू.जी. 13.5 ग्राम/एकड़ या सल्फोसल्फूरान+मेटसल्फूरान का तैयार मिश्रण 16 ग्राम/एकड़ को पहली सिंचाई से पहले या सिंचाई के लगभग 10 दिन बाद 120 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें ।
  • किसान भाइयों से अनुरोध है कि वह गेहूँ की फसल में  पीला रतुआ रोग का निरीक्षण नियमित रूप से करते रहें । पीला रतुआ रोग आने पर निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि संस्थान में कृषि विशेषज्ञ को सूचित करें एवं सलाह लें । पीला रतुआ पत्तियों पर पीली धारियों के रूप में  आता है तथा पत्तियों से  हल्दी जैसा पीला पाउडर झड़ता है । पीला रतुआ निश्चित होने पर प्रोपिकोनेजोल 25 ई.सी.का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें । एक एकड़ के लिए 200 मि.ली.दवा 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें ।
  • गेहूँ में पत्ती माहूँ (चेपा) के लिए भी निरंतर निगरानी रखें । अगर पत्ती माहूँ की संख्या आर्थिक क्षतिस्तर (ई.टी.एल.-10-15 माहूँ/किल्ला) को पार करती है , तब क्यूनालफोस 25 प्रतिशत ई.सी. नामक दवा की 400 मि.ली. मात्रा 200-250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।
  • जौ में नियमित सस्य क्रियाएं करने की सलाह दी जाती है|
  • जौ में संकरी पत्ती जैसे की मंडूसी/कनकी, जंगली जई, पोआ घास, लोमड़ घास के नियंत्रण के लिए पिनोक्साडेन 5 ई.सी. 400 मि.ली. प्रति एकड़ का प्रयोग करें तथा चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए मेटसल्फूरान 20 डब्ल्यू.पी.8 ग्राम/एकड़ या 2,4-डी का प्रयोग कर सकते हैं।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक
1. डॉ. आर.के.शर्मा (नोडल अधिकारी एवं अध्यक्ष)
2. डॉ. रविश चतरथ (सदस्य)
3. डॉ. बी.एस.त्यागी (सदस्य)
4. डॉ. आर.एस.छोकर (सदस्य)
5. डॉ. अनुज कुमार (सदस्य)
6. डॉ. पूनम जसरोटिया (सदस्य)
7. डॉ. विष्णु गोयल (सदस्य)
8. डॉ. अंकिता झा (सदस्य सचिव)

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